57 · उज़्बेकिस्तान · निर्माण लगभग 1420
रेगिस्तान चौक, समरकंद
एक ही चौक के सामने तीन टाइलदार मदरसे, जिनमें से एक खगोलशास्त्र का था।
अभी किसी ने दावा नहीं किया। आपका नाम रजिस्टर खोलता है — $3 से।
धारकों का रजिस्टर
रजिस्टर खाली है। जो पहले दावा करेगा, उसका नाम यहाँ हमेशा के लिए दर्ज होगा — $3 से।
कहानी
समरकंद के रेगिस्तान चौक के पूर्वी भाग में स्थित शेर-दोर मदरसे के विशाल प्रवेश द्वार पर एक दुर्लभ मोज़ाइक चित्र बना है: सफेद हिरण का पीछा करते दो बाघ और उनकी पीठ से उगते मानव चेहरे वाले चमकीले सूरज। यह रेगिस्तान ("रेतीली जगह") चौक की भव्यता का प्रतीक है, जो तैमूरी साम्राज्य में सिल्क रोड का मुख्य मिलन स्थल था।
खगोलशास्त्री सुल्तान का मदरसा
1410 के दशक में तैमूरलंग के पोते और महान खगोलशास्त्री उलुग बेग ने यहाँ पहला मदरसा बनवाया, जो गणित और खगोलशास्त्र की शिक्षा का शीर्ष केंद्र बन गया।
उलुग बेग ने समरकंद की पहाड़ी पर विशाल वेधशाला बनाकर दूरबीन के आविष्कार से सदियों पहले सौर वर्ष की लंबाई की सटीक गणना की (जिसमें आधुनिक परमाणु घड़ियों की तुलना में केवल कुछ सेकंड का अंतर था) और 1000 से अधिक तारों का विस्तृत कैटलॉग तैयार किया।
17वीं सदी में शेर-दोर मदरसा और तिल्ला-कारी ("स्वर्णिम") मदरसा बनकर तैयार हुए। तिल्ला-कारी की सपाट छत पर सोने के वर्क से ऐसा दृष्टि-भ्रम (Trompe-l'œil) बनाया गया है कि वह देखने में एक गहरा स्वर्णिम गुंबद लगती है।
1932 में सोवियत इंजीनियर व्लादिमीर शुखोव ने उलुग बेग मदरसे की झुकी हुई मीनार को बिना तोड़े स्टील केबलों की मदद से सीधा किया।
2001 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित समरकंद का रेगिस्तान चौक मध्य एशिया के इस्लामी स्थापत्य और नीली टाइल कला का स्वर्णिम मुकुट है।