धारकों का रजिस्टर
रजिस्टर खाली है। जो पहले दावा करेगा, उसका नाम यहाँ हमेशा के लिए दर्ज होगा — $3 से।
कहानी
लगभग अस्सी वर्ष की आयु में उस्मानी साम्राज्य के मुख्य वास्तुकार मीमार सिनान ने हागिया सोफिया के गुंबद से भी भव्य और निर्बाध संरचना बनाने का संकल्प लिया। अपने संस्मरणों में सिनान ने शहज़ादे मस्जिद को अपनी 'शिक्षुता' (Apprenticeship), सुलेमानिये को 'कारीगरी' (Journeyman) और एदिर्ने की सेलिमिये मस्जिद को अपनी 'उस्तादी' (Masterpiece) की अंतिम कृति बताया।
आठ खंभों पर टिके विशाल गुंबद का चमत्कार
1568 से 1575 के बीच सुल्तान सेलिम द्वितीय के आदेश पर एदिर्ने की ऊँची पहाड़ी पर निर्मित इस मस्जिद ने इस्लामी वास्तुकला में एक नई क्रांति ला दी:
सिनान ने 31 मीटर से अधिक चौड़े विशाल गुंबद को दीवारों के पास स्थित आठ विशाल अष्टकोणीय खंभों (फ़िलपाये) पर टिकाया, जिससे बीच का पूरा प्रार्थना कक्ष बिना किसी स्तंभ के पूरी तरह खुला और विशाल बन गया। इसकी 71 मीटर ऊँची चार पतली मीनारों के भीतर तीन अलग-अलग घुमावदार सीढ़ियाँ बनाई गई हैं, जिससे तीन मुअज़्ज़िन एक-दूसरे से मिले बिना अलग-अलग बालकनियों तक पहुँच सकते हैं।
मुअज़्ज़िन चबूतरे के संगमरमर के खंभे पर एक उल्टा ट्यूलिप फूल उकेरा गया है, जो उस ज़मीन के मूल मालिक के ट्यूलिप बगीचे की याद दिलाता है।
2011 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित सेलिमिये मस्जिद उस्मानी और इस्लामी वास्तुकला की सर्वोच्च पराकाष्ठा है।