धारकों का रजिस्टर
रजिस्टर खाली है। जो पहले दावा करेगा, उसका नाम यहाँ हमेशा के लिए दर्ज होगा — $3 से।
कहानी
1881 में मिस्र के अधिकारी लक्सर के सामने पहाड़ी चट्टानों में बने एक कुएँ में उतरे और उन्हें एक गलियारे में लगभग चालीस फ़राओ की ममियाँ एक के ऊपर एक मिलीं: रामसेस द्वितीय, सेती प्रथम, थटमोस तृतीय और अहमोस प्रथम सहित। एक स्थानीय परिवार ने यह खोज दस साल पहले ही कर ली थी और चुपचाप कलाकृतियाँ बेच रहा था।
ये फ़राओ यहाँ दफ़न नहीं किए गए थे। तीन हज़ार साल पहले पुजारियों ने एक-एक क़ब्र खोलकर हर ममी निकाली, उसे संवारकर एक पर्ची लगाई और सबको इस एक गुप्त कुएँ में रख दिया, क्योंकि क़ब्रों की लूट रुक ही नहीं रही थी।
पिरामिड बनाना क्यों बंद किया
16वीं सदी ईसा पूर्व में मिस्र के न्यू किंगडम के राजाओं को एहसास हुआ कि पिरामिड एक विज्ञापन है। वे थीब्स की पश्चिमी तट पर आए और एक सूखी तंग घाटी में पत्थर काटकर गुप्त सुरंगें बनाईं तथा प्रवेश द्वारों को मलबे से भरकर छिपा दिया। स्थान चुनाव संयोग नहीं था: घाटी के ऊपर प्राकृतिक पर्वत शिखर 'अल-क़ुर्न' एकदम पिरामिड की आकृति का है।
क़ब्र खोदने वाले कारीगर गाँव 'दीर अल-मदीना' में रहते थे। उन्होंने टूटे बर्तनों और चूना पत्थर के टुकड़ों पर सब कुछ लिखा: हाज़िरी रजिस्टर, प्रेम कविताएँ और अदालती फ़ैसले। जब लगभग 1157 ईसा पूर्व में अनाज की राशन देर से आई, तो उन्होंने काम बंद कर मंदिर के सामने धरना दे दिया। यह इतिहास की पहली दर्ज मज़दूर हड़ताल मानी जाती है।
नवंबर 1922 में हावर्ड कार्टर ने तूतनखामुन की क़ब्र (KV62) लगभग बिल्कुल सुरक्षित पाई, जिसमें 5,000 से अधिक वस्तुएं और प्रसिद्ध सोने का मुखौटा मिला।
1979 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित राजाओं की घाटी प्राचीन मिस्र की परलोक-वास्तुकला का सबसे महान ख़ज़ाना है।