79 · माइक्रोनेशिया · निर्माण लगभग 1200
नान मादोल
प्रवाल भित्ति पर बेसाल्ट के खंभे चुनकर बनाए गए कृत्रिम टापुओं का पूरा नगर।
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धारकों का रजिस्टर
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कहानी
माइक्रोनेशिया के पोनपेई द्वीप के पूर्वी तट पर स्थित नान मादोल प्राचीन दुनिया के सबसे बड़े वास्तुशिल्प रहस्यों में से एक है। यह प्रवाल भित्तियों (कोरल रीफ) के ऊपर बनाए गए 92 कृत्रिम टापुओं का एक जल-नगर है जो समुद्री नहरों के जाल से जुड़ा है, जिसके कारण इसे 'प्रशांत महासागर का वेनिस' कहा जाता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी निर्माण सामग्री है: प्राकृतिक रूप से बने षट्कोणीय बेसाल्ट पत्थर के भारी लट्ठे (वज़न 50 टन तक), जिन्हें द्वीप के दूसरी तरफ से बांस के बेड़ों पर लादकर लाया गया था।
जादू से उड़े पत्थर
13वीं से 17वीं शताब्दी के बीच सौडेल्यूर राजवंश द्वारा निर्मित इस शहर के बारे में स्थानीय मान्यता है कि दो जादूगर भाइयों ने मंत्रों के बल से इन भारी पत्थरों को हवा में उड़ाकर यहाँ स्थापित किया था। वास्तव में, कारीगरों ने बिना किसी गारे या सीमेंट के लकड़ी के केबिन की तरह बेसाल्ट के खंभों को एक-दूसरे पर आड़ा-तिरछा रखकर ये विशाल दीवारें खड़ी कीं।
राजाओं की मौन समाधियाँ
यहाँ की सबसे भव्य संरचना नंदोवास है, जो शाही समाधि और मंदिर परिसर है। इसकी 8 मीटर ऊँची दीवारें उस केंद्रीय तहखाने की रक्षा करती हैं जहाँ सौडेल्यूर शासकों को भारी पत्थर की पट्टियों के नीचे दफनाया गया था।
1628 के आसपास सौडेल्यूर राजवंश के पतन के बाद इस रहस्यमयी शहर को छोड़ दिया गया और प्रकृति तथा मैंग्रोव के जंगलों ने इसे घेर लिया।
2016 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित नान मादोल प्रशांत महासागर में प्राचीन इंजीनियरिंग का विस्मयकारी चमत्कार है।