49 · भारत · निर्माण 1648
लाल किला
हर स्वतंत्रता दिवस पर इस मुग़ल क़िले की प्राचीर से तिरंगा फहराया जाता है।
भारत के स्मारकों पर कुल खर्च $100 होने पर खुलेगा।
धारकों का रजिस्टर
रजिस्टर खाली है। जो पहले दावा करेगा, उसका नाम यहाँ हमेशा के लिए दर्ज होगा — $3 से।
कहानी
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद जब ब्रिटिश सेना ने दिल्ली पर नियंत्रण किया, तो क़िले के भीतर के संगमरमर के अधिकांश महलों, हरम और शाही बागों को ढहा दिया गया और उनकी जगह सैनिकों के लिए बैरकें बना दी गईं। आज बचे हुए महलों के बीच जो खुले घास के मैदान दिखाई देते हैं, वे उन्हीं तोड़े गए महलों की खाली जगह हैं।
शाहजहाँ का लाल बलुआ पत्थर का दुर्ग
मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने अपनी राजधानी को आगरा से दिल्ली (शाहजहानाबाद) स्थानांतरित करते समय 1639 से 1648 के बीच लाल क़िले (लाल क़िला) का निर्माण करवाया। लाल बलुआ पत्थर की विशाल प्राचीरों के भीतर 'दीवान-ए-आम' (जनता की सुनवाई का कक्ष) और 'दीवान-ए-ख़ास' (खास मंत्रियों का संगमरमरी कक्ष) बनाए गए।
क़िले के महलों के बीच से यमुना नदी के जल से चलने वाली संगमरमर की नहर 'नहर-ए-बिहिश्त' (स्वर्ग की धारा) बहती थी, जो दिल्ली की भीषण गर्मी में प्राकृतिक वातानुकूलन का काम करती थी।
मयूर सिंहासन की लूट
1739 में फ़ारसी आक्रांता नादिर शाह ने दिल्ली को लूटा और दीवान-ए-ख़ास से बेशकीमती हीरों-जवाहरात से जड़े 'मयूर सिंहासन' (तख़्त-ए-ताऊस) को उखाड़कर ईरान ले गया। इसी दीवान-ए-ख़ास की दीवार पर प्रसिद्ध फ़ारसी शेर लिखा है: "गर फ़िरदौस बर रू-ए ज़मीं अस्त, हमीं अस्त ओ हमीं अस्त ओ हमीं अस्त" (यदि पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है, तो वह यहीं है, यहीं है, यहीं है)।
1947 में भारत की आज़ादी के बाद से हर 15 अगस्त को भारत के प्रधानमंत्री लाहौरी गेट की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं।
2007 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित लाल क़िला भारतीय संप्रभुता, स्वाभिमान और इतिहास का अमर प्रतीक है।
कहाँ है
Netaji Subhash Marg, Lal Qila, Chandni Chowk, New Delhi 110006
28.6562, 77.2410