धारकों का रजिस्टर
रजिस्टर खाली है। जो पहले दावा करेगा, उसका नाम यहाँ हमेशा के लिए दर्ज होगा — $3 से।
कहानी
1870 के दशक में मेइजी पुनर्स्थापना के दौरान एक व्यक्ति ने हिमेजी क़िले को नीलामी में छत की टाइलों के दाम पर खरीदा ताकि लकड़ी और टाइलें बेच सके। लेकिन जब उसने पहाड़ी पर बने छह मंजिला लकड़ी के टॉवर को गिराने की लागत का हिसाब लगाया, तो पाया कि उसे तोड़ने का खर्च कमाई से अधिक होगा और वह पीछे हट गया। जापान का सबसे भव्य क़िला इसलिए बच गया क्योंकि उसे ढहाना घाटे का सौदा था।
सफेद बगुला और युद्ध-यंत्र
1601 से 1609 के बीच इकेदा तेरुमासा द्वारा निर्मित यह क़िला समुराई सैन्य वास्तुकला का शिखर है। इसका प्रसिद्ध सफेद प्लास्टर सुंदरता के लिए नहीं, बल्कि लकड़ी को आग से बचाने के लिए लगाया गया था, जिससे इसे 'सफेद बगुला क़िला' (शिरासागी-जो) नाम मिला।
यह पूरा परिसर एक रक्षात्मक भूलभुलैया है: हमलावरों को भ्रमित करने वाले घुमावदार रास्ते, बंदूकों और तीरों के लिए दीवारों में बने छेद (सामा), और पत्थर गिराने के गुप्त रास्ते।
वह बम जो नहीं फटा
दिलचस्प बात यह है कि इस अभेद्य क़िले पर कभी हमला नहीं हुआ। जुलाई 1945 में अमेरिकी हवाई बमबारी ने पूरे हिमेजी शहर को जला दिया, लेकिन चमत्कारिक रूप से मुख्य टॉवर की ऊपरी मंजिल की लकड़ी पर गिरा आग लगाने वाला बम फटा ही नहीं। 1995 के कोबे भूकंप में भी क़िला पूरी तरह सुरक्षित रहा।
आंतरिक प्रांगण में प्रसिद्ध 'ओकिकु का कुआँ' है, जहाँ रात में प्लेटें गिनने वाली दासी की जापानी लोककथा जुड़ी है।
1993 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित हिमेजी क़िला जापान की समुराई परंपरा का सबसे गौरवशाली प्रतीक है।