धारकों का रजिस्टर
रजिस्टर खाली है। जो पहले दावा करेगा, उसका नाम यहाँ हमेशा के लिए दर्ज होगा — $3 से।
कहानी
फ़रवरी 1586 में अंग्रेज़ समुद्री लुटेरे सर फ्रांसिस ड्रेक के बीस से अधिक युद्धपोतों ने कार्तेहेना की खाड़ी में प्रवेश किया। उस समय शहर लगभग निहत्था था; ड्रेक की तोपों ने शहर को लूट लिया और उसे राख होने से बचाने के लिए भारी फिरौती वसूली गई। इस तबाही के बाद स्पेन के राजा फिलिप द्वितीय ने अमेरिका में सबसे उन्नत और अभेद्य सैन्य सुरक्षा प्राचीरें बनाने का आदेश दिया।
दो शताब्दियों तक चले निर्माण ने कार्तेहेना को कैरिबियन का सबसे सुरक्षित गढ़ बना दिया।
चाँदी और सोने की रक्षक दीवारें
कार्तेहेना दक्षिण अमेरिका से निकाले गए सोने और चाँदी को स्पेन भेजने का मुख्य केंद्र था। इस विशाल संपत्ति की रक्षा के लिए 11 किलोमीटर लंबी पत्थर की दीवारें बनाई गईं, जिनमें नज़दीकी द्वीपों से लाए गए कोरल स्टोन (मूंगा पत्थर) का उपयोग हुआ जो समुद्री नमक के प्रभाव को झेल सकता था।
इस रक्षा प्रणाली का मुख्य आकर्षण 'कैस्टिलो सैन फेलिप डी बाराजस' का क़िला था, जिसमें गुप्त सुरंगों का जाल था ताकि हमलावरों को जाल में फंसाया जा सके।
1741 का ऐतिहासिक मुकाबला
1741 में ब्रिटिश एडमिरल एडवर्ड वर्नोन ने 186 युद्धपोतों और 27,000 सैनिकों के साथ हमला किया—जो उस समय अमेरिका में जुटाया गया सबसे बड़ा हमलावर बेड़ा था। इसके सामने स्पेनिश कमांडर ब्लास डी लेज़ो के पास केवल 6 जहाज और 3,000 सैनिक थे। इसके बावजूद दीवारों की मजबूती और रणनीतिक योजना ने ब्रिटिश सेना को बुरी तरह परास्त कर दिया।
1984 में यूनेस्को विश्व धरोहर घोषित कार्तेहेना की दीवारें आज पर्यटकों के लिए कैरिबियन सागर के सूर्यास्त को निहारने का सबसे सुंदर स्थान बन चुकी हैं।